मन की गहराई से
अहेसास जिन्दगी में कभी न सोचा हो ऐसा अदभुत ओउलोकिक अविस्मर्णीय आनंद जहासे में कभी वापिस नहीं आना चाहता था एक ध्यान करके उन लम्हों में खो जाना चाहता था और ऐसे ही मधुर पल में हजारो लाखो साल तक अगर मुझे रहेना पड़ता तो भी में रहेता जहा भगवान भी आता तो कह देता की मुझे तुजसे भे ऊपर जो शक्ति हे वो गोकुलसे भी सुन्दर गाव हो वो और भक्ति से भी ऊपर जो शक्ति हो वो और जहा र्ह्दय के हर तार में एक संगीत की लहर हो हवाओ की तरह मनको छु कर जाने वाली वादियों से भी जुदा वो लहर हो रौशनी से भी तेज जहा चमक हो एंजेल सी एक पल हो तीनो लोक की सबसे सुनहरी पल हो और में उनके साथ हु तो भला में केसे दूर जाने की सोचता !!
जिसकी सोच मात्र से रोम रोम रोमांचित हो जावे जहा दुनियामे स्वार्थ घमंड और विकार हे लिकिन उनसे पर भी एक दुनिया हे जहा प्यार पवित्र रिश्ता माधुर्य दिव्य और अपूर्व ईश्वरीय शक्ति हे !! जिनके नाम मात्र से आपके सरीर में ताजगी आ जाये जिनके दर्शन मात्र से दुःख दूर हो जाए वो शक्ति आज भी मौजूद हे सिर्फ देखने का नजरिया होना चाहिए में हमेशा ये सोचता था की आज के युग में कोई किसीका सगा नहीं सब यहाँ स्वार्थी हे लेकिन आज मेरी वो सोच भी जूठी पड़ी में हमेशा खुद के सामने ही सवाल करता हु लेकिन उनके जवाब भी मेरा सुसुप्त मन दे देता हे !
में बहोत ही भाग्यशाली हु जो मुझे वो रिश्ता मिला वो प्यार मिला जो एक माँ- बहन- दोस्त-भाई का मिश्रण हे और मेरी नजर में वो देवी शक्ति से कम नहीं हे!!
एक ऐसा सपना की कभी न आया हो न सोचा हो में कभी कभी खुद से सवाल पूछता हु की" हसमुख" तू इतना पुण्य शाली तो नहीं हे फिर क्यों तुजे वो महा शक्ति का अहेसास और प्यार मिला जहा माँ सोनल की छबी दिखाई दे उनके ही विचारो की समज मिले लेकिन सही में में बहोत गर्व महेसुस करता हु मेरा मन मयूर पंखी की तरह जूम उठता हे !!
जहा स्वर्ग हे जहा कुदरत हे जहा प्यार हे और निश्वार्थ भाव हे वो एंजेल मूर्ति का दर्शन हरपल हो यही रबसे मेरी दुवाये हे मेरे मन में हमेसा सच्चे चारण की तरह पवित्रता बनी रहे आई श्री सोनल के उपदेशो का पालन करू और
सही जिन्दगी जीउ बस यही मेरा अरमान हे !!
जय माताजी
हसमुख गढवी
६/६/२०१ ३









